बिहार विधानसभा में गूंजा आनंद मोहन की रिहाई का मसला

बिहार विधानसभा में गूंजा आनंद मोहन की रिहाई का मसला

बिहार विधानसभा में गूंजा आनंद मोहन की रिहाई का मसला

बिहार विधानसभा में गूंजा आनंद मोहन की रिहाई का मसला

चेतन आनंद ने सरकार पर किया जोरदार हमला

तेजस्वी भैया के साथ अब, किसी भी हद से गुजर जाएंगे : विधायक चेतन आनंद

राजनीतिक प्रतिशोध और षड्यंत्र की वजह से सरकार नहीं कर रही है रिहाई : तेजस्वी यादव

मुकेश कुमार सिंह

पटना (बिहार) : शुक्रवार को बिहार विधानसभा में 14 साल, साढ़े पाँच महीने की सजा काट कर रिहाई की बाट जोह रहे पूर्व सांसद आनंद मोहन को लेकर जम कर बबाल हुआ। पूर्व सांसद आनंद मोहन के बड़े बेटे शिवहर के आरजेडी विधायक चेतन आनंद ने सदन में पुरजोर तरीके से उन तमाम बंदियों के लिए सवाल खड़े किए, जिन्होंने 14 वर्ष की सजा पूरी कर ली है लेकिन बिहार सरकार ने बंदियों को मिलने वाले परिहार को लेकर ना कोई बेबसाईट बनाई है और ना ही ऐसी कोई व्यवस्था की है जिससे परिहार को लेकर, पारदर्शी तरीके से जानकारी हासिल हो सके। बड़ी तायदाद में बंदी, सजा पूरी करने के बाद भी जेल में बंद हैं। चेतन आनंद ने 14 साल और करीब 6 महीने की सजा काटने के बाद भी, जेल की सलाखों में कैद, अपने पिता पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई क्यों नहीं हो रही है, इसके लिए सरकार से बेहद तल्ख लहजे में जबाब माँगा। चेतन आनंद के साथ विपक्ष के कई विधायकों ने भी आनंद मोहन की रिहाई को लेकर सवाल दागे। सरकार को इस हंगामे की खबर, एक दिन पूर्व से ही थी। सरकार की तरफ से पूर्व तैयारी के साथ आये प्रभारी गृह मंत्री सह ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र यादव ने सरकार की तरफ से कहा कि पूर्व सांसद आनंद मोहन, एक लोक सेवक के काम के दौरान हुई हत्या मामले में सजावार हैं। सरकार का ऐसे सजावार के लिए परिहार का कोई प्रावधान नहीं है। परिहार बोर्ड की बैठक बीते एक नवंबर को हो चुकी है। पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई किसी भी सूरत में नहीं हो सकती है। इस बयान के बाद, विपक्षी दल के नेताओं ने जम कर बबाल काटे। चेतन आनंद ने सदन में सरकार से सवाल करते हुए सुप्रीमकोर्ट और कई हाईकोर्ट की रूलिंग का हवाला देते हुए कहा कि संगीन से संगीन मामले में हुई हत्या के बाद भी सजावार बन्दी को परिहार देने का प्रावधान है। सरकार के मंत्री के बयान के बाद, चेतन आनंद काफी बिफरे और कई विधायकों के साथ सदन के बाहर धरने पर भी बैठे लेकिन सरकार पर इसका कोई असर नहीं हुआ। साझा प्रेस वार्ता के दौरान, चेतन आनंद ने कहा कि नीतीश कुमार और वर्तमान सरकार, उनके पिता से राजनीतिक दुश्मनी निकाल रहे हैं। उनके पिता उस जुर्म की सजा काट रहे हैं, जो उन्होंने किया ही नहीं है। वे संघर्ष करने वाले परिवार से आते हैं और आगे अपने पिता की रिहाई के लिए, पूरे बिहार में बड़ी मुहिम चलाएंगे। इस बार आर और पार की लड़ाई होगी। पूरे बिहार में जन सैलाब के आंदोलन से भूकम्प आएगा, जिससे सरकार को सम्भलना मुश्किल होगा। उन्हें नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी भैया का साथ मिल गया है। वे उनके और पार्टी के साथ मिल कर, पापा को रिहा करा कर रहेंगे। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि यह सरकार, सोच-समझ कर पूर्व सांसद आनंद मोहन जी की रिहाई नहीं कर रही है। राजनीतिक प्रतिशोध और व्यक्तिगत द्वेष की वजह से सरकार, पूर्व सांसद के मामले में कानून से भी खुद को ऊपर समझ रही है। उनकी पार्टी और वे पूर्व सांसद के साथ हैं और आगे हर तरह के संघर्ष कर के उनकी रिहाई को सुनिश्चित करेंगे। सरकार ने आज अपनी मंशा साफ कर दी है। सरकार पूर्व सांसद आनंद मोहन जी की कभी रिहाई नहीं होने देगी। कुल मिला कर, शुक्रवार को विधानसभा का सत्र पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई पर चलता रहा। बाद में, हंगामे की भेंट चढ़ गया। चेतन आनंद से मोबाइल के जरिये हुई हमारी बातचीत में, विधायक चेतन आनंद ने कहा कि अब हमारा परिवार सरकार से गुहार लगाने नहीं जाएगा। अपनी पार्टी और पापा के समर्थकों के साथ वे बड़ा से बड़ा आंदोलन कर के पापा की रिहाई करा कर रहेंगे। वे अपने पिता की रिहाई के लिए माननीय कोर्ट की शरण में भी जाएंगे। चेतन आनंद ने कहा कि बिहार के वर्तमान सीएम नीतीश कुमार, जिस समय सीएम नहीं थे, उस समय दिवंगत जार्ज फर्नांडिश, रामविलास पासवान सहित कई दिग्गज नेताओं के साथ पूर्व सांसद आनंद मोहन जी निर्दोष हैं, इसको लेकर धरने पर बैठे थे। उस समय नीतीश कुमार चीख-चीख कर कह रहे थे कि उनके पापा बिल्कुल निर्दोष हैं। लेकिन सत्ता की कुर्सी मिलते ही, उनकी नीयत और नीति दोनों बदल गयी। पटना के मिलर हाईस्कूल परिसर में महाराणा प्रताप को लेकर आयोजित कार्यक्रम के दौरान, नीतीश कुमार ने कहा था कि आनंद मोहन जी के समर्थक चिंता नहीं करें। वे खुद आनंद मोहन जी की चिंता कर रहे हैं। लेकिन नीतीश कुमार छल और प्रपंच की राजनीति से, सभी को धोखे में रखा। जेल में पापा ने साहित्य के क्षेत्र में बड़ा सृजन किया है। उनकी कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और कई पुस्तकें, प्रकाशन के लिए तैयार हैं। यही नहीं, उनकी रचना, "पर्वत पुरुषः दशरथ मांझी" एनसीआरटी के माध्यक से सीबीएसई के पाठ्यक्रम में शामिल है। सरकार, जेपी आंदोलन के मजबूत सिपाही को एक अपराधी, बताने की हर जुगत कर रही है। 29 जनवरी 2022 को, पटना के मिलर हाईस्कूल में आहूत "सिंह गर्जना रैली" के दौरान, पटना में वे अपनी और पापा की ताकत नहीं दिखाएंगे बल्कि सरकार को यह दिखाएंगे कि इतना बड़ा जन सैलाब किसी अपराधी के लिए नहीं उमड़ता है, वह भी विभिन्न प्रदेशों से आकर। नीतीश कुमार बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं, इसका बड़ा खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ेगा। नीतीश कुमार ठगी और षड्यंत्र की राजनीति करते हैं। अब उनका अंत समय आ गया है।